साबर मोहनी जाल वशीकरण SABAR MOHINI JAAL MANTRA

शक्तिशाली सिद्ध शाबर मंत्र और सुलेमानी शाबर मंत्र  को स्वयंसिद्धि मन्त्र के नाम से भी पुकारा जाता है  साबर तंत्र में इस साधना को मोहनी जाल के नाम से जाना जाता है | इसका प्रयोग कभी विफल नहीं जाता !इस से जहाँ अपने उच्च अधिकारी को अपने अनुकूल बना सकते है | वही अपने आस पास के वातावरण को अपने विरोध होने से रोक सकते है | अपनी झगड़ालू पत्नी जा पति को भी अपने वश में कर उसे अनुकूलता दे सकते है |शक्तिशाली शाबर मंत्र पहले से ही शक्तियों से परिपूर्ण और सिद्ध होते हैं। इन मंत्रों के केवल उच्चारण मात्र से व्यक्ति के सारे कार्य सिद्ध हो जाते हैं। इनके प्रयोग बहुत ही प्रभावी होता है। इन मंत्रों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन प्रभाव स्थिर होता है तथा इनकी काट निश्चित नहीं होती है। यह मंत्र आम बोल चाल की भाषा में होते हैं।

सिद्ध शाबर मंत्र (Sidh Shabar Mantra)

ॐ शिव गुरु गोरखनाथाय नमः

शाबर मंत्रों के प्रवर्तक मूल रूप से भगवान शिव के परम भक्त थे। शाबर मंत्रों की उत्पत्ति का श्रेय गुरु गोरखनाथ और गुरु मछन्दर नाथ को जाता हैं। अपने जप, तप और श्रद्धा के कारण गुरु गोरखनाथ और मछन्दर बहुत पूजनीय माने जाते हैं।

शाबर मंत्रो में जो शब्द इस्तेमाल किये गए हैं वो हमारी रोज़ की भाषा में इस्तेमाल में आने वाले ही शब्द है | शाबर मन्त्र का उचारण बहुत आसान होता है और यह मन्त्र बहुत शक्तिशाली होते हैं और यह बहुत जल्दी रिजल्ट देते हैं | इनमे से कुछ मंत्रो का मतलब स्पष्ट होता है और कुछ मंत्रो का कोई मतलब ही नहीं होता |
जब इन मन्त्रों का उचारण किया जाता है तो जाप करने वाले के मुख से ऐसी ध्वनियां निकलती है जो लौकिक और अलौकिक शक्तियों को खींचती है और उन् शक्तियों की मदद से कोई भी कार्य करवाया जा सकता है || शाबर मंत्रो को कोई भी इंसान बदल नहीं सकता अगर वो बदलता है तो यह मन्त्र काम नहीं करते |

वशीकरण शाबर मंत्र 

“बारा राखौ, बरैनी, मूँह म राखौं कालिका।| चण्डी म राखौं मोहिनी, भुजा म राखौं जोहनी।| आगू म राखौं सिलेमान, पाछे म राखौं जमादार।|| जाँघे म राखौं लोहा के झार, पिण्डरी म राखौं सोखन वीर।|| उल्टन काया, पुल्टन वीर, हाँक देत हनुमन्ता छुटे।|| राजा राम के परे दोहाई, हनुमान के पीड़ा चौकी।| कीर करे बीट बिरा करे, मोहिनी-जोहिनी सातों बहिनी।|| मोह देबे जोह देबे, चलत म परिहारिन मोहों।| मोहों बन के हाथी, बत्तीस मन्दिर के दरबार मोहों।-अब एक मुठ्ठी में चावल भरकर आग में डालें ||”

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